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काश! लौट आएं वो‌ लम्हें-02-Sep-2025

प्रतियोगिता हेतु 
दिनांक: 02/09/2025
काश! लौट आएं फिर वो लम्हें

काश! लौट आएं एक बार फिर से वो लम्हें,
जो बेखबर थे हर फ़िक्र से,
जो खुश थे अपनी ही दुनिया से,
न था कोई ग़म पास,
सिर्फ किताबें होती थीं साथ।

कॉलेज की वो ख़ूबसूरत शरारतें,
क्लास में आना-जाना,
और कुछ प्यारे दोस्तों का थामे हाथ।
काश! लौट आएं एक बार फिर से वो लम्हें,
जो बेखबर थे हर फ़िक्र से।

वो हंसी चेहरे की आज भी हम ढूंढते हैं,
आईने को देख लम्हों को याद करते हैं।
ज़िंदगी का फ़लसफ़ा अगर समझ में आ जाए,
तो हमें भी बताना-----
लम्हों से कैसे हम नज़रें चुराएं?

काश! लौट आएं एक बार फिर से वो लम्हें,
जो बेखबर थे हर फ़िक्र से…

शाहाना परवीन'शान'...✍️
मुज़फ्फरनगर उत्तर प्रदेश

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